इकबाल था बुलंद, उसे धूल कर दिया,

मद जिसका था प्रचंड, सारा दूर कर दिया,

राणा प्रताप एकमात्र, ऐसे वीर थे

अकबर का सब घमंड, जिसने चूर कर दिया.

सबसे बड़ा पाप है अन्याय को सह जाना,

वीरों को शोभा नहीं देता चुप रह जाना.

सूरज का तेज भी फीका पड़ता था, जब राणा तू अपना मस्तक ऊँचा करता था

थी राणा तुझमें कोई बात निराली इसलिए अकबर भी तुझसे डरता था


धन्य हुआ रे राजस्थान,जो जन्म लिया यहां प्रताप ने

धन्य हुआ रे सारा मेवाड़, जहां कदम रखे थे प्रताप ने

जब-जब तेरी तलवार उठी, तो दुश्मन टोली डोल गयी

फीकी पड़ी दहाड़ शेर की, जब-जब तुने हुंकार भरी

प्रताप की गौरव गाथा हर कोई सुनाएगा गाकर

मेवाड़ धरा भी धन्य हो गई प्रताप जैसा पुत्र पाकर


चेतक पर चढ़ जिसने, भाले से दुश्मन संघारे थे

मातृ भूमि के खातिर, जंगल में कई साल गुजारे थे

ये हिन्द झूम उठे गुल चमन में खिल जाएँ,

दुश्मनों के कलेजे नाम सुन के हिल जाएँ,

कोई औकात नहीं चीन-पाक जैसे देशों की

वतन को फिर से जो राणा प्रताप मिल जाएँ.