साहस का प्रतीक नीले घोड़े पर सवार

वीरता का प्रतीक मेरा मेवाड़ी सरदार

प्रताप का सिर कभी झुका नहीं

इस बात से अकबर भी शर्मिंदा था

मुगल कभी चैन से सो ना सके

जब तक मेवाड़ी राणा जिंदा था


आगे नदिया पड़ी अपार

घोड़ा कैसे उतरे उस पार,

राणा ने सोचा इस पार

तब तक चेतक था उस पार.