मुर्गे की अकल ठिकाने

एक समय की बात है, एक गांव में ढेर सारे मुर्गे रहते थे। गांव के बच्चे
ने किसी एक मुर्गे को तंग कर दिया था। मुर्गा परेशान हो गया, उसने सोचा
अगले दिन सुबह मैं आवाज नहीं करूंगा। सब सोते रहेंगे तब मेरी अहमियत सबको
समझ में आएगी, और मुझे तंग नहीं करेंगे। मुर्गा अगली सुबह कुछ नहीं बोला। 
सभी लोग समय पर उठ कर अपने-अपने काम में लग गए इस पर मुर्गे को समझ में आ गया कि किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता। सबका काम चलता रहता है।

नैतिक शिक्षा – घमंड नहीं करना चाहिए आपकी अहमियत लोगो को बिना बताये पता चलती है। 

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निडरता -Be Fearless 🤘

एक बार एक व्यवसायी पूरी तरह से कर्ज से डूब गया था और उसका व्यवसाय बंद होने के कगार पर था| वह बहुत चिंतित व निराश होकर एक बगीचे में बैठा था और सोच रहा था कि काश कोई उसकी कंपनी को बंद होने से बचा ले|

तभी एक बूढ़ा व्यक्ति वहां पर आया और बोला – आप बहुत चिंतित लग रहे है, कृपया अपनी समस्या मुझे बताइये शायद मैं आपकी मदद कर सकूं |

व्यवसायी ने अपनी समस्या उस बूढ़े व्यक्ति को बताई| 

व्यवसायी की समस्या सुनकर बूढ़े व्यक्ति ने अपनी जेब से चेकबुक निकाली और एक चेक लिखकर व्यवसायी को दे दिया और कहा – तुम यह चेक रखो और ठीक एक वर्ष बाद हम यहाँ फिर मिलेंगे तो तुम मुझे यह पैसे वापस लौटा देना|

व्यवसायी ने चेक देखा तो उसकी आँखे फटी रह गयी – उसके हाथों में 50 लाख का चेक था जिस पर उस शहर के सबसे अमीर व्यक्ति जॉन रोकफेलर के साइन थे|

उस व्यवसायी को यह विश्वास नहीं हो पा रहा था कि वह बूढ़ा व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि उस शहर का सबसे अमीर व्यक्ति जॉन रोकफेलर था| उसने उस बूढ़े व्यक्ति को आस-पास देखा लेकिन वह व्यक्ति वहां से जा चुका था|

व्यवसायी बहुत खुश था कि अब उसकी सारी चिंताएं समाप्त हो गयी है और अब वह इन पैसों से अपने व्यवसाय को फिर से खड़ा कर देगा|

लेकिन उसने निर्णय किया कि वह उस चेक को तभी इस्तेमाल करेगा जब उसे इसकी बहुत अधिक आवश्यकता होगी और उसके पास कोई दूसरा उपाय नहीं होगा| 

उस व्यवसायी की निराशा और चिंताएं दूर हो चुकी थी| अब वह निडर होकर अपने व्यवसाय को नए आत्मविश्वास के साथ चलाने लगा क्योंकि उसके पास 50 लाख रूपये का चेक था जो जरूरत पड़ने पर काम आ सकता था|

उसने कुछ ही महीनों में व्यापारियों के साथ अच्छे समझौते कर लिए जिससे धीरे धीरे उसका व्यवसाय फिर से अच्छा चलने लगा और उसने उस चेक का इस्तेमाल किये बिना ही अपना सारा कर्जा चुका दिया|

ठीक एक वर्ष बाद व्यवसायी वही चेक लेकर उस बगीचे में पहुंचा जहाँ पर एक वर्ष पहले वह बूढ़ा आदमी उससे मिला था|

वहां पर उसे वह बूढ़ा आदमी मिला, व्यवसायी ने चेक वापस करते हुए कहा – धन्यवाद आपका जो आपने बुरे वक्त में मेरी मदद की| आपके इस चेक ने मुझे इतनी हिम्मत दी कि मेरा व्यवसाय फिर से खड़ा हो गया और मुझे इस चेक का उपयोग करने की कभी जरूरत ही नहीं पड़ी|

वह अपनी बात पूरी करता तभी वहां पर पास ही के पागलखाने के कुछ कर्मचारी आ पहुंचे और उस बूढ़े आदमी को पकड़कर पागलखाने ले जाने लगे|

यह देखकर व्यवसायी ने कहा – यह आप क्या कर रहे है? आप जानते है यह कौन है? यह इस शहर के सबसे अमीर व्यक्ति जॉन रोकफेलर है| 

पागलखाने के कर्मचारी ने कहा – यह तो एक पागल है जो खुद को जॉन रोकफेलर समझता है| यह हमेशा भागकर इस बगीचे में आ जाता है और लोगों से कहता है कि वह इस शहर का मशहूर व्यक्ति जॉन रोकफेलर है| हमें लगता है कि इसने आपको भी बेवकूफ बना दिया|

वह व्यवसायी पागलखाने के कर्मचारी की बाते सुनकर सुन्न हो गया| उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि वह व्यक्ति  जॉन रोकफेलर नहीं था और एक वर्ष से जिस चेक के दम पर वह आराम से अपने व्यवसाय में जोखिमें उठा रहा था वह नकली था|

वह काफी देर सोचता रहा फिर उसे समझ में आया कि यह पैसा नहीं था जिसके दम पर उसने अपना व्यवसाय वापस खड़ा किया है बल्कि यह तो उसकी निडरता और आत्मविश्वास था जो उसके भीतर ही था| 

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जिराफ का संघर्ष - Inspirational Hindi Story of Giraffe 

जिराफ का बच्चा जब जन्म लेता है तो वह माँ के गर्भ से 10 फीट की ऊंचाई से पीठ के बल गिरता है। गिरने के बाद उसमें उठकर खड़े होने की शक्ति नहीं होती|

जब जिराफ का बच्चा खड़ा नहीं होता तो उसकी माँ उसे बार-बार जोर-जोर से लातें मारती है और वह बच्चा तब तक यह लातें खता रहता है जब तक कि वह उठकर खड़ा नहीं हो जाता| और कुछ देर बाद वह बच्चा डगमगाते हुए उठ कर खड़ा हो जाता है| 

अगर जिराफ़ के बच्चे को अपनी माँ से यह लाते खाने को न मिले तो वह खड़े होने से पहले ही शेर या अन्य शिकारी जानवर के पेट में पहुँच जाए|

तितली और जिराफ की तरह हर प्राणी को संघर्षों का सामना करना पड़ता है| प्रकृति का यही नियम हैं और जो व्यक्ति इस नियम को समझ जाता है वह सफल हो जाता है|

सफलता की हर कहानी एक असफलता की कहानी भी है| जो व्यक्ति असफलता को चुनौती समझकर स्वीकार करता है वह असफलता को हरा देता है और जो व्यक्ति असफलता से डर जाता है वह कुछ नहीं कर पाता|

Never Give Up – कभी हार मत मानो 

  “अधिकतर लोग ठीक उसी समय हार मान लेते है, जब सफलता उन्हें मिलने वाली होती है| विजय रेखा बस एक कदम दूर होती है, तभी वे कोशिश करना बंद कर देते है| वे खेल के मैदान से अंतिम मिनट में हट जाते है, जबकि उस समय जीत का निशान उनसे केवल एक फुट के फासले पर होता है|”                                                                                                                                               —— एच रोस पेरोट 

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चींटी और कबूतर की कहानी

एक बार कड़कती गर्मियों में एक चींटी को बहुत प्यास लगी हुई थी। वो पानी की तलाश में एक नदी किनारे पहुंच गयी। नदी में पानी पीने के लिए वो एक छोटी सी चट्टान पर चढ़ गयी और वहां पर वो फिसल गयी और फिसलते हुए नदी में जा गिरी। 

पानी का बहाव ज्यादा तेज़ होने से वो नदी में बहने लगी। पास ही में एक पेड़ पर कबूतर बैठा हुआ था। उसने चींटी को नदी में गिरते हुए देख लिया। कबूतर ने जल्दी से एक पत्ता तोडा और नदी में चींटी के पास फेंक दिया और चींटी उसपर चढ़ गयी। 

कुछ देर बाद चींटी किनारे लगी और वह पत्ते से उतर कर सूखी जमीं पर आ गयी। उसने पेड़ की तरफ देख और कबूतर को धन्यबाद दिया। शाम को उसी दिन एक शिकारी जाल लेके कबूतर को पकड़ने आया।

कबूतर पेड़ पर आराम कर रहा था और उसको शिकारी के आने का कोई अंदाजा नहीं था। चींटी ने शिकारी को देख लिया और जल्दी से पास जाके उसके पॉंव पर जोर से काटा। चींटी के काटने पर शिकारी की चीख निकल गयी और कबूतर जाग गया और उड़ गया।

नैतिक शिक्षा: कर भला हो भला। अगर आप अच्छा करोगे तो आपके साथ भी अच्छा होगा।

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भेड़िया और सारस की कहानी

एक बार एक भेड़िया किसी जानवर को खा रहा था और जल्दबाज़ी में खाते हुए उसके गले में एक हड्डी फस जाती है। काफी कोशिशें करने के बाद भी वो हड्डी उसके गले से नहीं निकलती। अब वो एक बुरी स्थिति में फस चुका था।

तभी उसे एक सारस दिखा और उसकी लम्बी चोंच दिखी। उसको देखते ही भेड़िये को एक सुझाव् आया की सारस उसकी मदद कर सकता है। वो मदद के लिए सारस के पास गया। उसने सारस से कहा की वो उसकी मदद करे बदले में उसे वो उसका इनाम देगा पहले तो सारस घबरा गया पर भेड़िये के इनाम देने के लालच में उसने हाँ कर दी।

सारस ने जल्द ही हड्डी उसके गले से निकल दी। हड्डी निकलते ही भेड़िया चलने लगा तो सारस ने कहा, मेरा इनाम? तो भेड़िये ने कहा की,” क्या यह काफी नहीं है कि मैंने तुम्हारा सिर को बिना काटे ही अपने मुँह से बाहर निकालने दिया, यही तुम्हारा इनाम है”।

नैतिक शिक्षा: जिसका कोई आत्मसम्मान नहीं है उसकी सहायता करने के लिए किसी पुरस्कार की अपेक्षा ना करें। स्वार्थी लोगों के साथ रहने से आपको किसी प्रकार की मदद नहीं मिलेगी।

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