उत्तराखंड में पलायन के लिए आज से लगभग बीस -पच्चीस साल पहले की वे औरतें भी ज़िम्मेदार हैं, जो ज़रा -ज़रा सी बात पर अड़ोसियों -पड़ोसियों को डायरेक्ट “तेरि कुड़ि बाँजि होली ” वाली गालियाँ देती थी |