alt

गुरु की ऊर्जा सूर्य-सी,

अम्बर-सा विस्तार,

गुरु की गरिमा से बड़ा, न

हीं कहीं आकार,

गुरु का सद्सान्निध्य ही,

जग में हैं उपहार,

प्रस्तर को क्षण-क्षण गढ़े,

मूरत हो तैयार

Related Posts
<h4>Loading...</h4>
Copyrights © 2022