हे भगवान जगन्नाथ थाम लेना मेरा हाथ,

कृपा करना कि मैं भी चलूँ आपके रथ के साथ.

Happy Rath Yatra


भगवन जगन्नाथ की कृपा से सुकून मिलता है. सब के दिल बेकरार होते है दर्शन प्राप्त के लिए. 

जो भी भक्तो श्रद्धा से दर्शन हो जाता है, उसकी हर एक मनोकामना पूरी होती है जगन्नाथ के आशीर्वाद से.


चन्दन की खुशबु, रेशम का हार, भादों की सुगंध, बारिश की फ्हुहार, दिल की उम्मीदे, 

अपनों का प्यार मंगलमय हो आपको लार्ड जगन्नाथ का त्यौहार. हैप्पी जगन्नाथ रथ यात्रा !


गुलाब की महक, फूलों के हार, भक्तो का प्यार और श्रद्धा से, 

खुशियों से बाईट हमारा यह त्यौहार, जगन्नाथ स्वामी की यात्रा 

और अषाढ़ी दूज की बहुत सुभेछा. हैप्पी जगन्नाथ रथ यात्रा !


हम यह आशा करते हैकि सबको भगवान का प्यार मिले 

और सभी अपने जीवन में खुशहाल रहे यही प्राथना करते है. हैप्पी रथ यात्रा


सबके दिलो को सुरूर मिलता है जो भी जाता है जगन्नाथ 

स्वामी जी के द्वार कुछ न कुछ जरूर मिलता है.

हैप्पी रथ यात्रा


इस यात्रा में सामिल हो ने के लिए आप सभी लोगो को हमारी 

और से शुभकामनायें. हैप्पी जगन्नाथ रथ यात्रा !


सूरज की किरणे, खुशियों की बहार, चन्दन की खुशबू, 

रेशम का हार, मुबारक हो आपको, भगवन जगन्नाथ का त्यौहार !!!


जब जब होवे धर्म की हानि तब तब अवतार 

लेवे भगवन कर देवे मर्दन पापियों का मुक्ति देवे 

हम पृथ्वी वासियों को बोलो जगन्नाथ प्रभु की जय हैप्पी रथ यात्रा !!!


जगन्नाथ स्वामी की ज्योति से नूर मिलता है सबके दिलो को सुरूर मिलता है जो भी जाता है 

जगन्नाथ स्वामी जी के द्वार कुछ न कुछ जरूर मिलता है. हैप्पी रथ यात्रा 2021 !!!


जय जगन्नाथ जिसका नाम है, पूरी जिसका धाम है ऐसे भगवन को, 

हम सब का परिणाम है, शुभ और मंगलमय हो.


ये हिन्द झूम उठे गुल चमन में खिल जाएँ,

दुश्मनों के कलेजे नाम सुन के हिल जाएँ,

कोई औकात नहीं चीन-पाक जैसे देशों की

वतन को फिर से जो राणा प्रताप मिल जाएँ.

आगे नदिया पड़ी अपार

घोड़ा कैसे उतरे उस पार,

राणा ने सोचा इस पार

तब तक चेतक था उस पार.


चेतक पर चढ़ जिसने, भाले से दुश्मन संघारे थे

मातृ भूमि के खातिर, जंगल में कई साल गुजारे थे

प्रताप का सिर कभी झुका नहीं

इस बात से अकबर भी शर्मिंदा था

मुगल कभी चैन से सो ना सके

जब तक मेवाड़ी राणा जिंदा था


प्रताप की गौरव गाथा हर कोई सुनाएगा गाकर

मेवाड़ धरा भी धन्य हो गई प्रताप जैसा पुत्र पाकर

जब-जब तेरी तलवार उठी, तो दुश्मन टोली डोल गयी

फीकी पड़ी दहाड़ शेर की, जब-जब तुने हुंकार भरी

साहस का प्रतीक नीले घोड़े पर सवार

वीरता का प्रतीक मेरा मेवाड़ी सरदार

करता हुं नमन मै प्रताप को, जो वीरता का प्रतीक है

तु लोह-पुरुष तु मातॄ-भक्त, तु अखण्डता का प्रतीक है

ये हिन्द झूम उठे गुल चमन में खिल जाएँ

दुश्मनों के कलेजे, नाम सुन के हिल जाएँ

कोई औकात नहीं चीन-पाक जैसे देशों की

वतन को फिर से जो राणा प्रताप मिल जाएँ