नबी की याद से रौशन

मेरे दिल का नगीना है

वो मेरे दिल में रहते है

मेरा दिल एक मदीना है

ईद ए मिलाद उन नबी मुबारक

दुनिया की हर फ़िज़ा में उजाला रसूल का

ये सारी क़ायनात सदका रसूल का

खुशबू-ए-गुलाब है पसीना रसूल का

आप को भी हो मुबारक महीना रसूल का

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मुबारक

मदीने में ऐसी फिजा लग रही है,

की जन्नत की जैसी हवा लग रही है,

मदीने पहुंच कर जमीन को जो देखा,

यह जन्नत का जैसे पता लग रही है…

!! ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मुबारक हो !!

वो अर्श का चरागाह है,

मैं उस के कदमों की धूल हूं,

ऐ जिंदगी गवाह रहना,

मैं गुलाम-ए-रसूल हूं…

!!ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मुबारक हो!!


रात हो पर उसमे उजाला करने वाला हो,

दिल हो पर उसमे कोई रहने वाला हो,

वक्त हो पर उसे कोई गुजारने वाला हो,

ख्वाब हो पर उसमे कोई आने वाला हो।

शुभ रात्रि

कितनी दिल नशी ये रात आई है,

आपकी ही मेरे लवो पे बात आई है,

हमने तो बहुत कोशिश की सोने की,

लेकिन फिर मुझे आपकी याद आई है।

शुभ रात्रि

जिस तरह चाँद आपको चाँदनी देता है,

और फूल खिल कर खुशबू देता है,

उसी तरह मेरा दिल आपको Good Night कह देता है।

शुभ रात्रि

अब तो ये हमारी आँखे भी हमसे सबाल करती हैं,

अब तो बस ख्यालों में ही ये रात कटती है,

जब तक हम आपको गुड नाईट न कह दे,

ये कम्बख्त नींद आने से इंकार करती है।

शुभ रात्रि