Kamaal Tya Nakhara Cha, ajab Tyar Style cha , Bholi Teri Smile cha or ve masuper hair style cha .. Naak Puchono ko ta sagor nicha or Haath ma mobile cha...
हे मेरी आंख्युं का रतन / नरेंद्र सिंह नेगी* ......................................................................................... हे मेरी आंख्युं का रतन बाला स्ये जादी,बाला स्ये जादी दूध भात दयोलू मी ते तैन बाला स्ये जादी-२ हे मेरी आंख्युं का रतन बाला स्ये जादी-४ मेरी औंखुडी पौन्खुड़ी छै तू, मेरी स्याणी छै गाणी मेरी स्याणी छै गाणी मेरी जिकुड़ी उकुड़ी ह्वेल्यु रे स्येजा बोल्युं मानी स्येजा बोल्युं मानी न हो जिधेर ना हो बाबु जन बाला स्ये जादी दूध भात दयोलू मी ते तैन,बाला स्ये जादी तेरी घुन्द्काली तू की मुट्ठ्युं मा मेरा सुखी दिन बुज्याँन मेरा सुखी दिन बुज्याँन तेरी टुरपुरि तों बाली आंख्युं मा मेरा सुप्न्या लुक्याँन मेरा सुप्न्या लुक्याँन मेरी आस सांस तेम ही छन बाला स्ये जादी हे मेरी आंख्युं का रतन, बाला स्ये जादी हे पापी निंद्रा तू कख स्येंयी रैगे आज स्येंयी रैगे आज मेरी भांडी कुण्डी सुचण रै ग्येनी, घर बोण कु काम काज घर बोण कु काम काज कब तै छनटेलु क्या बोन क्या कन, बाला स्ये जादी दूध भात दयोलू मी ते तैन,बाला स्ये जादी घात सार सारी की लै ग्येनी, पंदेरों बटी पंदेनी पंदेरों बटी पंदेनी, बाणु पैटी ग्येनी मेरी धौडया दगडया लखड्वेनी घस्येनी लखड्वेनी घस्येनी क्या करू क्या नि करू जतन बाला स्ये जादी हे मेरी आंख्युं का रतन,बाला स्ये जादी घर बौडू नि व्हायु जू गै छौ झुरै की मेरी जिकुड़ी झुरै की मेरी जिकुड़ी बिसरी जांदू वीं खैरी बिपदा हेरी की तेरी मुखड़ी सम्लौ न वो बात वो दिन बाला स्ये जादी दूध भात दयोलू मी ते तैन,बाला स्ये जादी बाला स्ये जादी-4
जीवन की गाड़ी धकेले रे मनखी / अनूप सिंह रावत * .................................................................................................................. जीवन की गाड़ी धकेले रे मनखी, बाटू च अभी बडू दूर. भाग मा त्यारा जू कुछ भी होलू, एक दिन त्वे मिललू जरूर. करम करदी जा, धरम करदी जा ................... अधर्म कु बाटू भेल ली जांदू, धर्म कु बाटू स्वर्ग मा जांदू. जैका जनि कर्म हे मनखी, फल भी दगिद्या ऊनि पांदू. जाति-पांति सब भेदभाव छोड़, सब च वै विधाता की नूर. जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा .......... फूलों कु बाटू बण्यूं च त्वेकू, कांडों का बाटा किलै छै जाणु. सब कुछ पाके भी से बाटा मनखी, त्वेन कभी सुख नि पाणु. दया धर्म कु बाटू जा रे मनखी, ना बण तू हे इतगा क्रूर. जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा .......... बगत कभी रुक्युं नि रांदु, आदत येकी भी मनखी जनि च. सब कुछ च त्वैमा हे मनखी, बस एक धीरज की कमि च. मनखी चोला माटा कु च रे, चखुलू सी उड़ी जालू फूर. जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा .......... रंग ही नि हुंदू फूलों की पछ्यांण, कांडों ना भी पछ्यांण हुंद. रंग रूपल नि पछ्नेंदु मनखी, वैका कर्मों न पछ्याण हुंद. प्रेम कु कल्यों त्वैमा रे मनखी, बांटी सकदी बांटी ले भरपूर. जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा .......... लू सदानी नि रैंदु चमकुणु, घाम आण मा सर्र गैली जान्द. पाप की गठरी नि बाँध रे, पाप कु घाडू फट्ट फूटी जान्द. अहम् छोड़ी दे रे दगिद्या, न कैर मनखी तू भंड्या गुरूर. जीवन की गाड़ी ....... भाग मा त्यारा ..........।
ब्याली तक जु निवासी छाई / अनूप सिंह रावत * .................................................................................................... ब्याली तक जु निवासी छाई, उ आज प्रवासी ह्वेगे। जल्मभूमि छोड़ी की उ, बिरणों का यख चलिगे।। हिटणु क्या जी सीख योन, सभ्या दौड़ी गैना। बचपन अपडू काटी जख, वै घौर छोड़ी गैना।। ज्वानि की रौंस मा अपडू, बचपन यखी छोडिगे। ब्याली तक जु निवासी छाई, उ आज प्रवासी ह्वेगे।। कूड़ी पुंगड़ी बांजी अर छोड़ियाल गौं गुठ्यार। झणि किलै चुभण लग्युं, यूँ थै अपडू ही घार।। डाली-बोटि पौण-पंछी देखा, धै लगान्दी रैगे। ब्याली तक जु निवासी छाई, उ आज प्रवासी ह्वेगे।। पुरखों की कूड़ी छोड़ी, किराया मकान मा रैणा छन। खेती-बाड़ी छोड़ी ऐनि, यख ज़िंगदी धक्याणा छन।। घौर बिटि भै-बंधु मा, यु पार्सल मगांदी रैगे। ब्याली तक जु निवासी छाई, उ आज प्रवासी ह्वेगे।। उकाल बिटि उन्दरी मा जाणा की, कनि दौड़ लगि च। कुछ देखा-देखि त, कुछ मजबूरी भी च।। क्वी पढ़ै कु क्वी रोजगार कु, बानु बणे छोड़ि गे। ब्याली तक जु निवासी छाई, उ आज प्रवासी ह्वेगे।।
महाभारत कलजुग मा / अनूप सिंह रावत महाभारत, कलजुग मा भी सतत जारी च। शकुनि मामा, नेतों कु अब भेष धारी च।। द्वापर मा लड़ै पांडव - कौरव। अब ये जुग मा, जाति अर धर्म का नौ पर यु, मनिख्यों लड़ाणा। अर सत्ता थैं अफि लग्यां हत्याणा।। द्रौपदी का जनि, अब भारत माँ लगीं च दाँव पर। अर हम पार्ट्यों का पिछिन्यां, नि छौ चिताणा। अर यु चटेळी कि मौज छन उड़ाणा।।
कुमाऊंनी महिला का अपने पति के लिए डरावना स्टेटस…. “मी तुमुकै भौते प्यार करनू पर ध्यान धरिया- म्यर विश्वास और तुमार भांट एक्के दिन टुटाल” 🙂 🙂 🙂
खिमदा आजकल गौं छौड़बेर दिल्ली में रौनी….. एक दिन खिमदा सोच में डूबी भै, घरवाईल पूछा …….क्ये सोच में पड़ी रछा ? खिम दा- मैं कें यो सोच लाग रईं कि यौ टेलीबिजन वालूँ कैं कसिक पत्त चलिजां कि….. घरवाई- क्ये पत्त चलूँ ? खिम दा- यौ कौनी कि आप देख रहे हैं स्टार प्लस … इनूं कैं कसिक पत्त चलूँ, हम स्टार प्लस चैनल देखण लाग रयूं
खिमुली – य जो रोज तुम फैसबुक में रोमांटिक शायरी लिखछा कि, ये तेरी जुल्फे है जैसे की रेशम की डोर , ? य कैक लिजी लिखछा ? खीमदा – त्यर लीजी तो लिखनू मै लाटी ! और को भै मेरि जिंदगी में….??? खिमुली – पै कभते त रेशमे डोर अगर हरि साग में ए जाछि तो किले चिल्लाछा हो ! 🙂 🙂 🙂
कुमाउनी में कुछ हिंदी फिल्मो के शीर्षक : १. TITANIC – नाव फरकि गे २. Anaconda – आदिम खाणी वाल स्याप ३. आवारा पगला दीवाना – पगली गियो साल ४. देवदास- शरबिया ५. अजब प्रेम की गजब कहानी – अन्कस प्यार क क्याप कहानी ६. मै हूँ ना – मी छियो ना ७. कुछ कुछ होता है – क्याप क्याप हु छ ८. धड़कन – धक् धक्काट ९. दंगल – थेचा-थेच १०. एक था टाइगर – एक छो बाघ 🙂 🙂 🙂
उत्तराखंड में पलायन के लिए आज से लगभग बीस -पच्चीस साल पहले की वे औरतें भी ज़िम्मेदार हैं, जो ज़रा -ज़रा सी बात पर अड़ोसियों -पड़ोसियों को डायरेक्ट “तेरि कुड़ि बाँजि होली ” वाली गालियाँ देती थी |