गोरी कईके सिंगार,नाचे पुरे बिहार.
ये बाबू बोली ना,डैडी बोल ना.
रही कबलें कुमार पापा बोली ना.

तोहरो ई बेटबा के,
फुटल बा करम.
जिंस वाली लईकी देखके,
आवे हमरा शरम.

कईके नया विचार,लाव कनिया उधार.
ये बाबू बोली ना,डैडी बोल ना.
रही कबलें कुमार पापा बोली ना.

हीरबा अऊर बुलुआ के ,
मिल गेलई कनिया .
टोन मारे हमरा के ,
रौशनलाल बनिया.

हमर फुटल कपार,
न मिले सजनीं के प्यार.
ये बाबू बोली ना,डैडी बोल ना 
रहीं कबले कुमार पापा बोली ना.

मिली टीवी- फ्रिज़ जबले , 
संग दुल्हिनियॉ .
पैसा के बंडल संगे,
नाचे नागीनीयॉ.

त देम नजर उतार,
मिली सजनीं के प्यार.
बेटा सुन न, सुग्गा सुन ना
न तु रहब कुमार तोता सुना

बाबूजी हमें भोंको ना सुईया मछरिया,
बाबूजी हमें रोको न आठों पहरिया.

जनम हैं छूटे यहाँ, छूटे शहर हैं,
छूटी जईहें अब बाबुल की दुअरिया.

नज़र पड़ेगी मईया जब जब डगर पे,
नाहीं अइबो तोहे हम नजरिया.

भैया बुलईबो, बुलईबो बाबूजी तोके,
बाकी हम जानत, ना अइहें लितहरिया.

सोने की पिंजरा, जतन से भेजत हो,
हमका ना चाहीं चांदी की सिकरिया.

लईकन में मजली, जवनिया बहरात बा,
अब घीसी जईबे अंगनवा ससुरारिया.

अजगर के धोती आऊरी बादुर के टोपी,
हमरो देता तू एगो नैका चाकर चदरिया।

नईहर छोड़ाई दिए, देबो ना गारी,
काहे छिनलु तु हमरे सब अधिकारिया.

माई कहलू जईसन, नीके रहली हम,
मिलबो हो गईल अब काहे दुस्वरिया.

ससुरा अढावत रहे, सासू मारे ताना,
पियो मिलवलु तु गजबे बहुरुपिया.

कईसे बताएं इहाँ, का का होखत है,
का होइल जाके पूछिहा चौकिदारिया.

अभियो बकत बाटे, जे होई से होई,
एतना अलगे मत करs कि हो जा तु दफतरिया.

बाबूजी हमें भोंको ना सुईया मछरिया,
बाबूजी हमें रोको न आठों पहरिया.

Kaounu kam na kaj ka, 
Sasura shatru haiy anaj ka, 
Chahe lagao eko sonta, 
Chahe maro danda, 
Ghat talak na jaeehe bhaiya, 
Ladi na uthaeehe bhaiya, 
Khara khara chillaheeye bhaiya, 
Khancha bhar ke khaeehe bhaiya, 
Dolatti bhi chalaeehe bhaiya, 
Dantwa bhi dekhleehe bhaiya, 
Jane keker hay jana, 
Sasura khawat hay chana.
Eker bigral ba chalaniya, 
Jab bhi dekhat hay nachaniya, 
Ab ka hum batlaen bhaiya, 
Kaeese tumhen sunayen bhaiya, 
Aur agar batla bhi den to ee ho jaeehe censor, 
Pornhunter wale nahin rahne den ge member, 
Laloo ji ko phone kiya to hanse bahut aur bole, 
Ee to vidyavan haiy janta hi bas tole, 
Ya to bhejo Bharat eko ya rakho Pakistan, 
Do din mein ban jaeehe bhaiya ee to sabka pran, 
Awat hay chunao bhaiya ee ban jaeehe cheeta, 
Mano ya na mano ee to hoihe sabka neta. 

अबकी आवे अइसन नयका साल
हो जाये हर गाँव-शहर खुशहालभइया के मुँह से फूटे संगीत
भउजी के कंगना से खनके ताल

आवे रे आवे अइसन मधुमास
फूल खिलावे ठूंठ पेड़ के डाल

झूम-झूम के नाचे मगन किसान
एतना लदरे जौ-गेहूँ के बाल

दिन सोना के चाँदी के हो रात
हर अँगना मे अइसन होय कमाल

मस्ती मे सब गावे मिल के फाग
उड़े प्रेम के सगरो रंग-गुलाल

लौटे रे लौटे गाँवन मे गाँव
फेर जमे संझा के चौपाल

जेठ के दुपहरिया में
खटत बा ……….


………
एह उमेद पर
कि एक दिन सावन आई
मन के धरती हरियरा जाई
बाकिर..

हाय रे हमार पागल परान
घाम में जर के राख भइल
राह निहारत लाश भइल……
अब ………

एह फसल खातिर
का सावन .. का भादो ?

गरीबी !
ना हँसे देले ना रोवे
ना जीये देले ना मूए
साँप- छुछुंदर के गति देले
पागल मति देले
खोर-खोर के खाले


मजबूर देले आदमी के ——–
आग चले खातिर,
गदहा के बाप कहे खातिर,
दुधारू गाय के लात सहे खातिर

राउर चिट्ठी पढ़ के
मन बहुत खुश भइल।
रउरा जापान में वैज्ञानिक बानी।

जापान जाके भी ,
रउरा भोजपुरी याद बा ??
लोग दिल्ली जाते
भोजपुरी भुला जाला !

रउरा वैज्ञानिक बानी,
माडर्न टेक्नोलाजी के विद्वान
तबो रउरा भोजपुरी याद बा ???
लोग चपरासी बनते
भोजपुरी भुला जाला

पता ना लोग
अपना माई-बाप के
कइसे याद रखत होई?

एक ओर
कुकुरमुत्ता नियर फइलल
भकचोन्हर गीतकारन के बिआइल
कैसेट में
लंगटे होके नाचत बिया
भोजपुरिया संस्कृति।
(
……जइसे कवनो
कोठावाली के बेटी होखे……भा
कवनो गटर में फेंकल मजबूर
लइकी के नाजायज औलाद )

दुसरा ओर,
लोकरागिनी के किताब में कैद भइल
भोजपुरिया संस्कृति के दुलहिन के
चाटत बा दीमक ,सूंघत बा तेलचट्टा
काटत बा मूस।
एह दू नू का बीचे
भोजपुरी के भ्रम में हिन्दी के सड़ल
खिचड़ी चीखत
भोजपुरिये के जरल भात खात
मोंछ पर ताव देत
मस्त-मस्त करत

केतना नाजुक होला
भावुकता के क्षण
आदमी उगिल देला सब
लइका लेखा।
कवनो कसाई मन
ओमे से
उचिला लेला………अपना मतलब के बात
साइत एही के कहल जाला
सेंटीमेंटल ब्लैकमेलिंग

आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई
नर नर संगे, मादा मादा संगे जाई

हाई कोर्ट देले बाटे अइसन एगो फैसला
गे लो के मन बढल लेस्बियन के हौसला
भइया संगे मूंछ वाली भउजी घरे आई
आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई

खतम भइल धारा अब तीन सौ सतहत्तर
घूमतारे छूटा अब समलैंगिक सभत्तर
रीना अब बनि जइहें लीना के लुगाई
आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई

पछिमे से मिलल बाटे अइसन इंसपिरेशन
अच्छे भइल बढी ना अब ओतना पोपुलेशन
बोअत रहीं बिया बाकि फूल ना फुलाई
आज के डिमांड बा रउरा ना बुझाई